मातृभूमि की शान, तिरंगा लहरायेगा |
विश्वपटल पर मान, ज्ञान का दीपक देगा |
शस्त्र-शास्त्र का ज्ञान, दुधारी अस्त्र बनेगा |
शान्ति-मार्ग संज्ञान, जगत का बच्चा लेगा ||
गुरुवर दे दो ज्ञान, करूँ पद पंकज पूजा |
साधक सम्यक ज्ञान, धरूँ मन प्रण यह दूजा ||
जीवदया का भाव, अर्चना जिनवर तेरी|
सत्य, प्रेम की राह, कामना प्रभुवर मेरी ||
मधुर बोल कह मीत, कृष्ण मन राधा जीता।
गाढ़ी होगी प्रीत, प्रेम घट भरलो रीता
मोह त्याग मद छोड़, मुरारी बोले कौरव |
गांधारी के सूत, हुआ कुल दूषित गौरव||
भाव सदा हो नेक, नित्य पढ़ जीवन गाथा |
मातृभूमि पर देख, सदा नौछावर माथा ||
रिश्ते-नाते नेह, बंध मन तोड़ो सारे |
मुड़कर राही देख, कौन हैं बाजी हारे ||
चंचल मन में आस, पूर्ण हो मेरे सपने|
मंगल का हो वास, देहरी बैठे अपने ||
मन की करना आज, लगे सब रोड़े बौने|
रंगमंच का पात्र, जीव सब खेल खिलौने ||
हलधर सींचे खेत, करें हैं वर्षा खेला |
कई मास का यत्न, हुआ रे मिट्टी-ढेला ||
धान सडे हैं हाट, बरसती भीगी आँखें।
मूल्यांकन हैं पस्त, चोट खा घायल पाँखे ||
कुसुम सुराणा