नमन माँ शारदे! 🙏🙏भूषण छन्द!
अभिभावकों को समर्पित!
दीया जलता रहा सतत, तूफानों से भिड़ा अथक।
अंधेरों को निगल सकल, आगे-आगे बढ़ा पथक।।
बच्चों का सुधारने कल, आज स्वयं का नौछावर।।
अभिभावक सुधिजन सी लब, सहते रहे चोट दिल पर।
स्वरचित तथा मौलिक,
कुसुम अशोक सुराणा, मुम्बई।