नारी, प्रभु प्रतिरूप..
नारी प्रभु रचना, प्रतिरूप विधाता।
नारी, बिटिया, भगिनी, भार्या, माता।।
नारी शक्ति रूप, जीवन दात्री जननी।
नारी नारायणी, सुजाता, सुहासिनी।।
अंतरिक्ष से सागर तल तक डग भरती।
देखती सपने सुनहरे, सार्थक करती।।
प्रकृति-सी सुर साज संगीत रागिणी।
जीवन शृंगारित करती धरा सी धारिणी।।
नारी, सक्षम, सजग, सबल, सुसंस्कारी।
परम प्रभु की सर्वोत्कृष्ट रचना, उपकारी।।
संयम, सेवा, समर्पण भावना कल्याणी।
शिल्पकार जीवन की, सृष्टि-सी मोहिनी।।
नारी अर्धांगिनी, जीवन पथ सहचरी।
हाथों में थाम हाथ, खिलाती फुलवारी।।
महकती, चहकती प्रिय सखी सजनी।
विष्णु-लक्ष्मी, सीता-राम, राधे की राधा रानी।।
स्वरचित मौलिक रचना
चंचल जैन
मुंबई, महाराष्ट्र