1 8 6868 1 6868 कन्यादान कन्यादानघर आँगन की कली,प्रेम स्नेह से है पली,जायेगी जब ससुराल, दिल थाम लिजिए।।बोल बोले मीठे मीठे,अमृत सा रस घोले,पायेगी लाडो सम्मान,शिक्षा धन दिजिए।।नव यौवना लाडली,तितली सी मनचली,दमकेगी दीपज्योति,कौशल सिखाइये।।प्रीत पुष्प हो बहार,साजन का मिले प्यार,विवाह बंधन बेला,कन्यादान किजिए।।दो कुल की हैं लाज,सुर, लय, ताल, साज,बेटी तो धन पराया,आशीर्वाद दिजिए। ।स्वरचित मौलिक रचना चंचल जैनमुंबई, महाराष्ट्र Label Directed by द्वारा चंचल जैन Shared17 Dec 2024 Start 17 Dec 2024 End 17 Dec 2029 The Critic’s Corner इस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें सोनी सुराना 18-Dec-2024 Comment Like सभी बेटियों के लिए उपहार है ये पोस्ट Vibha Jain 29-Mar-2025 Comment Like आप चमकते रहें और बढ़ते रहें Khushi Jain 24-Jul-2025 Comment Like बहुत ही सराहनीय है। इसे पढ़कर मुझे बहुत खुशी हुई Sheetal Jain 19-Aug-2025 Comment Like वाह! बहुत सुन्दर Manali Jain 23-Aug-2025 Comment Like बहुत ही दिल को छू लेने वाली Manali Jain 19-Sep-2025 Comment Like बहुत सुन्दर प्रस्तुति 😍😍❤️😍😍 Sundeep Jain 17-Jan-2026 Comment Like अत्युत्तम सृजन Ashish Jain 12-Feb-2026 Comment Like बहुत बढ़िया लिखा है। कन्यादान © टिप्पणी 400 characters remaining जमा करें रद्द करें