घनाक्षरी


दुम क्यों दबाते हो।

शक्ति को पहचानिए,
खूब कौशल पाइए,
दुम क्यों यूँ दबाते हो,
साहस घूंट पीजिए।।

पीछे पीछे आये कोई, 
शरारती आतताई,
डटकर हो धुलाई,
मजा आप लीजिए।।

तंग करे राह चले,
देख आप हो अकेले,
जमकर हो पिटाई, 
सबक तो दीजिए।।

करे कोई अत्याचार, 
नवदुर्गा अवतार,
दुराचारी का मर्दन, 
सामना तो कीजिए।।

स्वरचित मौलिक रचना 
चंचल जैन
मुंबई, महाराष्ट्र 




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