3 3 2587 3 2587 घनाक्षरी दुम क्यों दबाते हो।शक्ति को पहचानिए,खूब कौशल पाइए,दुम क्यों यूँ दबाते हो,साहस घूंट पीजिए।।पीछे पीछे आये कोई, शरारती आतताई,डटकर हो धुलाई,मजा आप लीजिए।।तंग करे राह चले,देख आप हो अकेले,जमकर हो पिटाई, सबक तो दीजिए।।करे कोई अत्याचार, नवदुर्गा अवतार,दुराचारी का मर्दन, सामना तो कीजिए।।स्वरचित मौलिक रचना चंचल जैनमुंबई, महाराष्ट्र Label Directed by द्वारा चंचल जैन Shared17 Dec 2025 Start 17 Dec 2025 End 17 Dec 2030 The Critic’s Corner इस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें कुसुम सुराणा 18-Dec-2025 Comment Like वाह!❤️❤️ Yogesh Jain 09-Jan-2026 Comment Like अत्त्युत्तम सृजन। जय हो। Vibha Jain 13-Mar-2026 Comment Like बधाई हो! घनाक्षरी © टिप्पणी 400 characters remaining जमा करें रद्द करें