कुंजबिहारी... कुंजबिहारी, किशन, कन्हैयाँ ,
रंग दो मोरी धानी चुनरियाँ,
बंसी बजय्या, मनमोहन न्यारे,
खेलो होली, राधे संग प्यारे|
अबीर, गुलाल उड़े गलियोंमें,
गोपगोपियाँ नांचे गोकुल में,
रास रचे जमुना तीर ग्वाले,
तन मन हार, झूमे मतवाले|
राधा खोई, बंसी की धुन मे,
जग भूल, फिरे गलियन में,
मनमोहन, जग तारण हारे,
होली खेलो, श्याम प्यारे||

स्वरचित तथा मौलिक,
कुसुम अशोक सुराणा, मुम्बई |
इस पर लोग क्या कह रहे हैं
  • बहुत खूब वीणा जी! पुरानी स्मृतियों में आँसू और मुस्कान का इंद्रधनुषी जलवा नज़र आता हैं।
  • बहुत बढियाँ प्रस्तुति