वन वे, टू वे, रन वे...
प्यार, मोहब्बत, समर्पण, सहयोग, वैवाहिक जीवन में 'वन वे' मायने नहीं रखता।
टू वे हो जीवन पथ। हाथों में साथी, हाथ हो।
लेकिन इस हाथ से दो, उस हाथ से लो, वाले नीति नियम न हो। रिश्तों में तोल मोल न हो।
कर्तव्य विमुख करता रन वे न हो। मात पिता को वृद्धाश्रम कभी न भेजो। अपने कर्तव्य से मुंह न मोडो।
आओ, जीवन रथ को सुचारु चलाने के लिए हम साथ रहें, मिलजुलकर प्यार से रहें।
स्वरचित मौलिक विचार
चंचल जैन
मुंबई, महाराष्ट्र