माँ महागौरी..

छुम-छुम करती पधारो महागौरी, ले डमरु-त्रिशूल,

नवरात्री में मात सुधारो रत्नगर्भा वसुंधरा की भूल!

सहस्त्र किरणों से सजा अम्बर का स्वर्णिम थाल,

अरुणिमा से सुशोभित माँ का श्वेत-धवल कपाल!

कैलाशपति की प्रियंवदा, महागौरी करो निहाल!

पञ्चारति उतार करें अर्चना, हिमगिरी पर्वत माल!

रूण झुण रूण झुण करती मैया पधारो मेरे द्वार, 

नवरात्रि में दरबार सजा लो, करों भारत भू उद्धार!

धवल वस्त्र-धारिणी, निर्मल गंगा की धार, 

माथे हीराजड़ित टिका, गले ग्रह-नक्षत्र हार!

रत्न-जड़ित कर्णफुल, मुख स्मित हास्य श्रृंगार!

प्रकटो चारभुजाधारिणी, करो शुम्भ-निशुम्ब पर प्रहार!

अमृत कलश उंड़ेलो धरा पर, बरसाओ अमिरस धार,

अभय मुद्रा से वर दो, करों भारत भू पर उपकार!

ब्रह्मरूपा, श्वेताम्बरा,अपरणीता, कल्याणी धीर-गंभीर!

देवी-देवता करे वंदन, शिव प्रियंवदा शिव मिलन अधीर!

विद्या, विवेक, विनय, वाणी, व्यवहार, विचार,

माँ महागौरी! भारत भूमि से हरो दुःख, दारिद्र, दुराचार!

संचित पाप-कुमति हारिणी, सजा दो त्रिलोक दरबार, 

कालरात्रि में मैया रोको धरणी पर स्त्री-भ्रूण संहार!

दशो-दिशाओं में गूंजे महागौरी तव शंखनाद-झंकार,

कल्याणी! तव कृपादृष्टी से फले-फूले सकल संसार!

रिद्धि-सिद्धि वर दे मैया भर दे धन-धान्य-भंडार! 

दुःख-सागर से पार लगा दो मैया, अटकी नैया मंझधार!

खल-असुर-संहार हेतु, प्रकटो माँ, करो धर्म-रक्षा! 

उठा त्रिशूल कर-कमल में, करो जीव-सृष्टी-रक्षा! 

पाप, ताप, शोक हरिणी माता दो शस्त्र-शास्त्र दीक्षा

ऋषभ आरोहिणी महागौरी, सम्पन्न करो मम प्रतीक्षा!

रुम झुम रुम झुम बाजे पैन्जणियाँ, खोलो मन्दिर द्वार,

महागौरी मात पधारो भारत भू पर करने खल-संहार!

स्वरचित तथा मौलिक,

कुसुम अशोक सुराणा, मुम्बई, महाराष्ट्र 

 

 

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