महकाती यादें अतीत की


महकाती यादें अतीत की...

सखियों संग खूब घुमना,
कभी नदिया तीर जाना,
सीप मोती रेत में ढूंढना,
फुहारों का आनंद लेना।।

चाट, भेल पूरी चट करना,
गोलगप्पे खूब मजे ले खाना,
कुल्फी खाते जी न भरना,
मसाला डोसा बांटकर खाना।।

भोलापन मन को था सुहाता,
दोस्ती का वादा निभाता,
अतीत की खुशबू मन महकाती,
रंगबिरंगे ख्बाव सजाती।।

फुरसत के कुछ पल मिले हैं,
मित्रता के सुंदर क्षण मिले है,
चाय, काॅफी की तलब रमे है,
यादों के महकते पुष्प सजे है।।

अतीत की खुशबू सजाता,
भविष्य को यादों का गुलदस्ता,
कल का हर पल तो बेगाना है,
आज का आनंद भरभर लेना है।।

स्वरचित  मौलिक  रचना
चंचल जैन
मुंबई,  महाराष्ट्र
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