नारी!
गांव की हो या शहर की नारी!
चनिया, चोली या जींस में प्यारी!
खेत-खलियान या उच्च पदों की अधिकारी!
सरपंच, सांसद, जनतंत्र की पुजारी!
नारी!
सृष्टि की तू अनुपम, अदभुत रचना!
रच्चनहारे की सुन्दर, सशक्त कल्पना!
खेत-खलियानों की रौनक हरीयाली,
बूंद-बूंद स्वेद से सजी पत्ती-पत्ती-डाली!
नारी!
तू मईया! जीवनदायिनी, गंगा,जमुना!
तू बहना! शरद पूनम की उजली रैना!
बाबुल के आंगन की तू लाड़ली मैना!
पथरीली पगडंडियों पर भले भीगे नैना!
नारी!
अंग-अंग में बहे तेरे प्रेम-रस की धारा!
तू जननी, भार्या, भगिनी, भक्त मीरा!
कोमल पंखुड़ियों सी तू चंचल, अधीरा!
महिषासुर मर्दिनी, पाणिनी का तेजोमय औरा!
नारी!
धरती सी क्षमाशील तू, अम्बर सी विशाल ह्रदय तू ,
हिमशिखरों सी शुद्ध-धवल तू, स्फटिक सम शुद्ध-बुद्ध तू!
जगत जननी, मात भवानी, वीरों की तू मां कल्याणी!
तू भार्या, अर्धांगिनी, प्रिया, प्यारी भगिनी!
नारी!
रिश्तों की धूरी तू, समर भवानी, त्रिभुवन वारी!
पन्ना, पद्मिनी, लक्ष्मी, जिजाऊ, मीरा, कौशल्या, कल्पना प्यारी!
खेल-कुद या राजनीति के मैदान की खिलाड़ी हैं भारी!
तमगों, सफ़लता की लिखे नित कहानी न्यारी!
नारी!
तू झुग्गी-झोपड़ी, घांस-पुंस की सेज की शोभा!
गांव, ढाणी, पोल की तू है निश्चल आभा!
बाज सी ऊंची उड़ान की मानिंद, तू विभा!
ममता की ज्योति पुंज, उज्वला, रत्नगर्भा!
नारी!
अंतरिक्ष में हिंद का परचम लहराती सुनीता!
ओलिंपिक, पैरालंपिक में तमगों की बारिश करती विनीता!
एक हाथ में शस्त्र, एक में शास्त्र, कुरान, गीता!
तू दुर्गा, लक्ष्मी, वीणावादिनी, नारी! पूजे तुझे विधाता!
स्वरचित तथा मौलिक,
कुसुम अशोक सुराणा, पवई, मुंबई, महाराष्ट्र