बंधन आत्मीयता का


भाई बहन का रिश्ता,
अनूठा अद्भुत नाता,
गरिमामयी प्रेमिल,
आनंद खिलाइए।।

पीहर लागे सुहाना,
यादों से भरा खजाना,
नटखट मन मोर,
खूब मुस्कुराइए।।

रक्षाबंधन उत्सव,
संस्कार सजा वैभव,
निर्मल परम खुशी,
झोली भर लाइए।।

रेशम धागा बंधन,
प्रेम भाव हो चंदन,
अपनों से मिलने का,
हर्ष महकाइए।।

स्वरचित मौलिक रचना 
चंचल जैन
मुंबई, महाराष्ट्र
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