चाहिए जनाब मजबूर न कोई उदास चाहिए जनाब
इससे बढ़के कुछ न खास चाहिए जनाब 
हर हाथ रोजगार हो हर पेट में रोटी
न्याय शिक्षा और विकास चाहिए जनाब

गंदी सियासत से न गुमराह मुल्क हो
स्वास्थ्य और शिक्षा यहां बिल्कुल निःशुल्क हो
आमजन के साथ हावी वर्दी न रहे
भयमुक्त हो समाज गुंडागर्दी न रहे

अपराधियों को कारावास चाहिए जनाब
न्याय शिक्षा और विकास चाहिए जनाब

व्यवहार सत्ता का कभी रुखा नहीं रहे
गरीब से गरीब भी भूखा नहीं रहे 
रोटी के लिए अपनों से कोई दूर नहीं हो
पलायन के लिए कोई भी मजबूर नहीं हो

काम सबको घर के पास चाहिए जनाब
न्याय शिक्षा और विकास चाहिए जनाब

समान हों सब पिछड़े -अगडे़ नहीं रहें
जाति-धर्म वाले वो झगडे़ नहीं रहें
संताप से कोई खतम न खुशी करे
कर्जे में न कोई किसान खुदकुशी करे

समृद्धि यहां सबके पास चाहिए जनाब
न्याय शिक्षा और विकास चाहिए जनाब

विक्रम कुमार
मनोरा, वैशाली
बिहार 

द्वारा Vikram Kumar
Shared02 Dec 2025
Start 01 Dec 2025
End 01 Dec 2030
इस पर लोग क्या कह रहे हैं