अलविदा.. वर्ष 2025
अलविदा! अलविदा ! 2025 अलविदा!

जिंदगी की किताब का,
खुल गया नया पन्ना ....
कोरे कागज पर सजी ,
मंगलमय शुभ अल्पना!
नए वर्ष शुभारम्भ पर,
मयूरपंखी नव कल्पना !
 
सपनों की देहरी पर, 
जगमगाया नन्हा दीया।
देख सितारों भरा दोना,
हर्षित विभावरी का जिया।
प्रकृति सुधबुध खो कर,
कहा रहीं नव वर्ष! आ पिया!

जिंदगी की मय से भरा, 
जाम से जाम टकराए जा!
खुशियों को 'चियर्स' कर...
गीत नए गुनगुनाए जा !
नव वर्ष के शुभारम्भ पर,
आगाज कर मुस्कुराये जा।

स्वागतम् ! सुस्वागतम् ! 

नव वर्ष तुम्हारा स्वागत है!
परिवर्तन अनुपम आगत है।
अनजान पथ का राही तू,
सुख-दुःख तेरे हमराही हैं।
ज़िन्दगी अनसुलझी पहेली है,
चंद लम्हों की अठखेली है|

आज झूम ले रे मनवा!
कल का है किसे भरोसा?
ज़िन्दगी के पत्तल पर,
तकदीर ने क्या परोसा?
उड़ान भर नील गगन में,
फैला कर बाज के परों सा।

जिंदगी के शामियाने तले,
गले मिल इस कदर,
धडकने पल-पल तेज हो,
मदमस्त हो दर-बदर।
अनमोल मनुज जन्म है,
दिल खोल कर उसकी कद्र।

रोते हुए आये हैं  मगर,
हँसते हुए जायेंगे हम!
अनमोल लम्होंकी सौगात,
सारे जहां को बांटेंगे हम!
नव वर्ष की मोहन वीणा पर,
नूतन रागिणी छेड़ेंगे हम। 

स्वरचित तथा मौलिक
 कुसुम अशोक सुराणा,  मुंबई!

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इस पर लोग क्या कह रहे हैं
  • बहुत खूब.. दीप से दीप जलेंगे तो जीवन रोशन हो जायेगा! प्रेरणादायक सुन्दर प्रस्तुति!