8 4 2241 8 2241 न जानें क्यों.... न जाने अरावली की इन गहरी खाइयों से मेरा क्या रिश्ता है? जब भी मैं कुंभलगढ़ के करीब बसे गांव सादड़ी में 'ताराचंद जी की बावड़ी' के पास आती हूं, इतिहास के पन्ने फड़फड़ाने लगते हैं ...बहती पवन का शोर कानों में शीशा उंडेलने लगता है, मंदिर में पत्थर पर गुदे पांच शीश और ताराचंद जी का प्यारा घोड़ा मानो गर्दन हिला-हिला कर कुछ कहने को बेताब हो उठता है! आखिर क्यों? क्या पिछले जन्म का रिश्ता है मेरा? क्या राज दफन है इस बावड़ी में? कुंभलगढ़! महाराणा प्रताप की जन्मस्थली! मेवाड़ी तलवार की तेजोमय धार का प्रतीक! हार का दंश लिए भटक रहे राणा को जब घास की रोटी खाकर दिन गुजारने पड रहे थे और मेवाड़ी फाग की आन, बान, शान का ढलता सूरज अस्ताचल की ओर बढ़ने को मजबूर था तब इन्हीं वादियों में बसे भामाशाह ने उन्हें संबल दिया था, हिम्मत दी थी, अपनी सारी दौलत मायर भूमि की स्वतंत्रता पर कुर्बान कर! भामाशाह और ताराचंद जी दोनों भाई-भाई! दोनों दानवीर भाईयों ने न सिर्फ अपनी दौलत राणा को अर्पण की थी बल्कि रण-संग्राम में अपनी जान तक न्यौछावर कर दी थी! यहीं है वो बावड़ी.. जो आज भी चीख-चीख कर दोनों रणबांकुरे भाईयों की दान वीरता तथा बहादुरी की कहानी बयां कर रही हैं! यहीं वो सात मंजिला गहरी बावड़ी हैं जिसमें आज भी कई दरवाजे, सीढियां नजर आती हैं और आंखों के सामने वह मंज़र उभर कर आता है जब पांचों ठकुराइनें धगधगती आग में कुद कर सती हो गई थी! यहीं है वो पावन भूमि जहां पर ताराचंद जी का प्यारा घोड़ा रणभूमि से उनका कटा सिर लेकर आया था और यहीं पर उनकी पांचों रानियां चिता में कूदकर भस्म हो गई थी! क्यों खींचती है यह धरती, यह बावड़ी मुझे अपनी ओर? क्या रिश्ता है मेरे पूर्वजों से मेरा? आज भी कोई भी शुभकार्य हमारे पूर्वजों को जात दिए बिना संपन्न नहीं होता! हर वक़्त एक खींचाव सा महसूस होता है जब तक मैं मस्तक नहीं झुकाती उस मंदिर की चौखट पर! वहां फूल अर्पित करने के बाद ही मन को सुकून, शांति मिलती हैं मानो मैंने मेरे पितरों की आत्मा को शीतलता पहुचाई हो! न जाने क्या रिश्ता था मेरा? क्या यहीं पर सती होने के बाद से भटक रही है मेरी आत्मा? स्वरचित तथा मौलिक, कुसुम अशोक सुराणा, मुम्बई | Label Directed by द्वारा कुसुम सुराणा Shared11 Dec 2024 Start 16 Jan 2026 End 16 Jan 2031 The Critic’s Corner इस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें Beena Mehta Jain 02-Apr-2025 Comment Like बेहतरीन प्रस्तुति Tanu Jain 24-Apr-2025 Comment Like बहुत बढियाँ Yogesh Jain 03-May-2025 Comment Like बहुत सुन्दर कहानी! आगे जे वहाग का इंतज़ार रहेगा!🙏❤️🙏❤️🙏❤️🙏 Sachin Jain 25-Feb-2026 Comment Like बहुत सुंदर न जानें क्यों.... © टिप्पणी 400 characters remaining जमा करें रद्द करें