स्वराज्य का शिल्पकार सहयाद्री की वादियों में, गूंजे जय जयकार!
हिंदवी स्वराज्य का परचम , लहराया हिमगिरी पार!

हिंदवी स्वराज्य का शिल्पकार, प्रजा का पालनहार!
गुर्रिल्ला रणनीति का पुरोधा, छत्रपति शूरवीर, सरदार!

माँ जिजाऊ का लाडला, नारी का तारण हार!
करोड़ों शोषित, पीड़ित का रखवाला, करें दुष्ट-संहार!

दीन-दुःखियों का मजबूत सहारा, हिन्दू ह्रदय सम्राट!
मातृशक्ति का दुलारा, बहन-बेटियों की रक्तिम ललाट!

समर्थ स्वामी रामदास का शिष्य, धर्म-रक्षणार्थ थामे तलवार!
दुश्मन की कुटिल चालों को समझ करें मर्म पर वार!

दृढ निश्चयी, धाड़सी, संकल्पवान, रणबाँकुरा शिवराय!
सुन घोड़ों की टाप दूर से, दुश्मन मुगलों की छाती धड़काय!

सिँहगर्जना से थर्राए रणभूमि, सुन घोड़ोंकी चित्कार!
महाराष्ट्र मुकुटमणी, "जाणता राजा" भरे गड़ से हुंकार!

"मानाचा मुजरा" छत्रपति शिवाजी, स्व-राष्ट्र-स्वप्न हुआ साकार!
मराठा साम्राज्य स्थापित कर, आतताइयोंको पहुँचाया यम-द्वार!

स्वरचित तथा मौलिक रचना
कुसुम अशोक सुराणा, मुंबई, महाराष्ट्र।
चित्र : अनजान कलाकार के सौजन्य से 🙏🙏
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