रोटी

फोटो प्रतियोगिता

रोटी याद दिलाये माँ के नेह-ममता की,
चुपडी रोटी, मन मोहे खुशबू देसी घी की,
प्यार-दुलार, मोह-माया माँ के आँचल की,
रोटी के आगे रंगत फिकी पंच पकवान की।।

स्वरचित  मौलिक  रचना
चंचल जैन
इस पर लोग क्या कह रहे हैं
  • वाह बाहय खूब! फूले हुएँ फूलके देख मुँह को पानी आ गया चंचल जी!❤️🙏❤️🙏❤️🙏❤️
  • मम्मी की हथेलियों से बनी गरम गरम रोटियां के सामने सब कुछ फीका है 😍