दीप अपनी माटी के...

दीप अपनी माटी के

दीप माला,पुष्पहार,
सजाये बंदनवार,
रंगोली में रंग भर,
आँगन सजाइये।।

दीप अपनी माटी के,
प्रेम पगी संस्कृति के,
घर-द्वार उजियारा,
उत्सव मनाइये।।

होवे आदर-सत्कार,
खिले आनंद बहार,
फल, मेवा, मिठाई, 
सब-मिल खाइये।। 

मेरा भारत महान,
स्वदेशी का हो सम्मान,
राष्ट्र प्रेम, दीप ज्योति,
आलोक जगाइये।। 

इस पर लोग क्या कह रहे हैं
  • बहुत खूब.. दीप से दीप जलेंगे तो जीवन रोशन हो जायेगा! प्रेरणादायक सुन्दर प्रस्तुति!
  • क्या खूब लगती है, बड़ी सुन्दर दिखती है ❤️❤️❤️❤️
  • बहुत सुन्दर कविता लिखी है। मैं आपकी लेखनी की सराहना करता हूँ।