"हार"

"हार"
"हार" 
हां मैं हार गया हु।।।। 
हां मैं हार गया हूँ शरीर की हर उस जकड़न से जिसने मुझे जकड रखा हैं।।। 
हां हां मैं हार ही गया हूँ।।।। 
क्या क्या रखा हैं इस ज़माने मै।।।।।। हां 
गम के सिव।।।।। 
मोहब्बत कहा हैं यहाँ खुद के सिवा।।।।। 
अरे चंद रुपयों के चक्कर मैं मेरी बीवी ने मुझसे गवारा नहीं किय।।।।। 
अरे तुम हो ही कौन।।।।। कौन हो आखिर।।।।।। 
तुमसे मैं क्यों हमदर्दी दिखाऊ।।।। 
अरे मैं क्यों तुमपे तरस खाऊ।।।।। 
अरे ये बेग़रद बेहया ज़माना हैं साहब।।। । 
मैं क्यों इनसे शर्म खाऊ।।।।। 
अरे क्या सोच रहे हो।।।।।। 
थक जाऊँगा।।।।।  हार जाऊँग।।।।।।। 
पर मैं लौटकर फिर आऊंगा।।।।। 
हां हां सही सोच रहे हो।।।।। 
हार गया हु मैं।।।।।। 
पर इस हार को मैं अपना सही पता नहीं बताऊंगा।।।।। 
उस जीत की चूक को मैं फिर ज़िंदा करके आऊंगा।।।।।। 
अरे हां जा देदी चेतावनी तुजे।।।।।। 
उखाडले जो उखाड़ सकता हैं।।।। 
अरे बिगाड ले जो बिगाड़ सकता हैं।।।। 
मैं हाथ नहीं आऊंगा।।।।।। 
मैं जीत के दिखाऊंगा।।।।।। 
हआ हूँ मैं दुखी आज।।।।।। तो क्या हार मान लू।।।।। 
अरे उठ कर उस धरती से आया हूँ जहा पीने को पानी नहीं था।।।। 
अरे मैं उस माटी का लाल हूँ 
उस माँ का लाल हूँ
जो मुझे स्कूल भेजने के लिए खुद चल के आती हैं।। 
तुम क्या मुझे हराओगे।।।। 
मैं उस माँ का लाल हूँ । 
जिसने गोली अपने सीने पर खाई थी।।।।।। 
मैं उस माँ का बेटा हूँ जिसकी हर लहू की बूँद मैं बलिदान था।।।।। 
तुम क्या मुझे हराओगे।।।।। 
मैं जीत का आखरी स्वर हूँ।।।।। 
हरालो अरे जाओ कह दिया हरालो।।।।। 
अरे हैं अगर इस ज़माने मैं दम।।।। तो हरा के दिखाओ।।।। 
मैं हार नहीं मानूंगा।।।।। 


द्वारा Yatharth Puri
Shared21 Jan 2026
Start 21 Jan 2026
End 21 Jan 2031
इस पर लोग क्या कह रहे हैं