गुरुवर चरणों में वंदन
गुरु का आदर पूजा वंदन।
पाए शुभाशीष मन रंजन।।
सुख साधन भरना भंडारा।।
परमानंद सुमित झंकारा।।
अद्भुत, सुंदर मंगलकारी।
गढते हैं मूरत हितकारी।।
भाव गहन स्वर हीरे मोती।
ज्योतिर्मय जगमग लौ होती।।
गुरुवर पंथी दीपक बनते।
भूले भटके का दुख हरते।।
हिम्मत, विद्या गागर भरते।
ज्ञान ध्यान से जीवन घडते।।
गुरु वंदन श्रद्धा से करना।
प्रेरक ज्ञानी झरता झरना।।
अंतस में उजियारा भरना।
सदाचार मणि माला गढना।।
स्वरचित मौलिक रचना
चंचल जैन
मुंबई, महाराष्ट्र