नमन माँ शारदे!🙏🙏पुष्पमाला छंद (वारातागा ) गीत!
फूल सा खिलना यहाँ।
गौरवान्वित हो जहाँ।।
सूर्य को जो झेलते।
रश्मियों से खेलते।
राह सुरभित हैं करें।
रंग जीवन में भरें।।
खत्म जीवन है कहाँ।
गौरवान्वित हो जहाँ।।
कर्म ही अब अर्चना।
धर्म की हो पालना।
मस्तमौला हो सदा।
मृत्यु का भय हो तदा।।
अन्त है तन का वहाँ।
गौरवान्वित हो जहाँ।।
भारती गुण गान हो।
राष्ट्र का अभिमान हो।
देश खातिर ही जियो।
राष्ट्र हित विष को पियो।।
मातृ भू पद पा अहाँ।
गौरवान्वित हो जहाँ।।
स्वरचित तथा मौलिक,
कुसुम अशोक सुराणा, मुम्बई।