माँ शारदे को नमन! 🙏🙏
यशोदा छन्द!
जगण+गुरु+गुरु*4
पलाश देखो, बुला रहा है।
तपी धरा को, रिझा रहा है।
खिले जहाँ में, सरोज नीले।
मिले जहां भी, सुकून जी ले।
शहीद ले लो, सलाम मेरा।
सदा तुम्हें हो , प्रणाम मेरा।
धरा हमारी, सपूत देती।
बहादुरी के, सबूत देती।।
लहूँ तुम्हारा, बहा जहाँ है
पवित्र सारी, जमीं वहाँ है।
निशान जिन्दा, यहाँ मिलेंगे।
वितान चौड़े, यहाँ सजेंगे।
स्वरचित तथा मौलिक,
कुसुम अशोक सुराणा, मुम्बई।