माँ भारती!

क्रान्तिकारीयों के रक्त-चन्दन से प्रक्षालित, भारत भूमि की प्रतिमा!
स्वतंत्रता की देवी, जननी जन्मभूमि की परम उत्कर्षित गरिमा!
विधायिका, न्यायपालिका, कार्यपालिका, मिडिया लोकतंत्र के स्तम्भ!
जन, गण, मन के ह्रदय-स्पंदन से हुआ गणतंत्र का आरम्भ!
भारत माँ का लाडला भीम, दलित बौद्ध आंदोलन का जनक!
भारतीय संविधान निर्माता, जन- अधिकार-कर्तव्य-उद्घोषक!
विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र, सार्वभौमिक प्रजासत्ताक देश!
जनता द्वारा, जनता के लिए, जनता से चुना गया राष्ट्र विशेष!
कैसे बखाण करूँ? जहाँ एक आदिवासी महिला बने राष्ट्रपति!
कैसे उड़ान न भरूं? जहाँ चायवाला प्रधान बढ़ाएं विकास गति!
कैसे न हो जनता खुश? जब मुख्यमंत्री बने रिक्शावाला, किसान, योगी!
कैसे न हो विश्वास? जब सलाखों के पीछे हो भ्रष्टाचारी, ढोंगी!
विश्व गुरु बने माँ भारती, जन-जन उतारे नंदादीप-आरती!
कर्मयोगी बन लहराओ परचम, हो ज्ञान-सूर्य से तेजोमय धरती!
अपराधी, आतंकी, हत्यारें न चढ़ पाएँ लोकतंत्र-मन्दिर-सीढ़ी!
न्यायदेवता को बन्धुआ बनानेवालों को माफ करें न नई-पूरानी पीढ़ी!
भाईचारे-सौहाद्र बिंधते वाग-बाणों को मत चढ़ाना प्रत्यँचा पर!
नफरत की ऊँची घास को उखाड़ फेंको माँ भारती के चरणों पर!
माँ भारती के विजय जल्लोष से अधर सदा अनुरक्त रहें!
दुश्मन की छाती पर चढ़कर तिरंगा शान से फहराते रहें!
माँ भारती के खातिर जन-जन बलिवेदी पर तैयार रहें!
सदा सर्वदा भारतीय जल, थल, वायुसेना शिखर चूमती रहें!
संस्कृति, सभ्यता, संस्कारों के बल पर विश्वजीत कहलाएंगे!
सक्षम, सशक्त, संयमी भारतीय श्वेत कबूतर नभ में उड़ाएंगे!

स्वरचित तथा मौलिक,
द्वारा कुसुम अशोक सुराणा, मुंबई, महाराष्ट्र

 

इस पर लोग क्या कह रहे हैं
  • बहुत खूब.. दीप से दीप जलेंगे तो जीवन रोशन हो जायेगा! प्रेरणादायक सुन्दर प्रस्तुति!
  • अत्त्युत्तम सृजन। जय हो।