नैतिक कहानियाँ

कैकई-वर दशरथ भए व्याकुल, कैकई वर दोनों सुन! शापित राजा के स्वप्न हुए धूमिल, कैसे चुकाएं कैकई-ऋण?।।१।। राम राज्याभिषेक की बेला में, क्यों पड़ी राहू-केतू की छा...
श्री गणेशाय नम: "वक्रतुण्ड महाकाय, सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघनम कुरु मे देव, सर्वकार्येषु सर्वदा"