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वक़्त द्वारा chandra katyal1 days ago
अक्सर जब कोई व्यक्ति सेवानिवृत होता है तो वो अपनी बाकी की ज़िंदगी को गुजारने के जाने कैसे कैसे सपने देखता है |  अपने मन की इच्छाओं आकांछाओं को व्यक्त करते हुए वो वक़्त से क्या कहता है .. कुछ स्वरच...
कुंदन द्वारा चंचल जैन5 days ago
सोना तप कुंदन हो जाएं।बेशकीमती वह कहलाएं।।कर्मों से सार्थकता पाएं।मानवता का दीप जलाएं।।
दो पैरों वाला ये प्राणी है जन्मों जन्मों का शातिर | इसने रब का खेल बनाया छल के मंसूबों की खातिर ||   रब जो यत्र तत्र मिलता था भोले चेहरों पर खिलता था | मीठी वाणी सुथरे मन में अविरल गंगा सा...
माया-मोह के बन्धन में, सपनों का संसार।क्रोध-अहम् की आँधी, भड़का रही अंगार।।स्वार्थ-दम्भ के सायों से, रिश्तों को लगा ग्रहण।शिकवे-गिलों की होड़ में, नेह का हुआ क्षरण।।दो प्रेमी दिलों के बिच, दो ध्रुवों के...
बाला छंद (वर्णिक छंद)3 रगण +गुरु = 10 वर्ण (212 212 212 2)रात में तारिका है लुभाती।चांदनी में नहाने बुलाती।।चन्द्रमा की कला मोह लेती। कुंतलों को खुला व्योम देती।।रागिणी मीत की गा रही है।मोहि...
ज़िन्दगी द्वारा chandra katyal7 days ago
यह धूप छाँव से भरी ज़िंदगी जितनी खूबसूरत है उतनी ही गहरी और जटिल भी | इसी सिलसिले में कुछ स्वरचित पंक्तियाँ प्रस्तुत कर रहा हूँ |                                                                      ...
(मनहरण घनाक्षरी छंद पर आधारित )शीर्षक : मन!मनुज जनम पाया,सत्य मार्ग अपनाया प्रभु को मन में ध्याया,कर्म योग धारिए।जीवन यशस्वी सदा,निराशा हो यदा-कदा,दुष्ट पर उठे गदा,शोषित को तारिए।खुल कर मनु जिया,...
मेरी नानी चुरमा लड्डू मीठे-मीठे,गोलमटोल बनाती नानी।।खूब खेलो, करो पढ़ाई, मीठी बातें करती नानी।। नानी खिलाती मेवा मलाई, रोज सुनाती नई कहानी।।पेड़ पौध पर प्यार जताती,नवांकुर को सहेजत...
मायका द्वारा चंचल जैन12 days ago
वो मायके का सुकूनपीहर की यादें मन को सताती रहती हैं। रोजमर्रा के काम काज से मुक्त हो क्षणात पीहर हो आता है मन। पुनः तरो-ताजगी साथ लेकर ससुराल आ जाता है। माना कि ससुराल भी उतना ही, मानो न मानो उससे भी ...
चौपाईचोरी कर बच निकला बन्दा।बढ़ चढ़ कहता दे दो चन्दा।कोतवाल खुद फिर कैसा डर।राम नाम का हूँ सौदागर।।अंदर-बाहर दूषित आनन।कलियुग का मैं भ्रमित दशानन।नरक लोक वासी मेरा तन।राम जन्म स्थल है अति पावन।।सेवक मन्...
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