साइंस फिक्शन स्नेह-नेह! द्वारा - कुसुम सुराणा2 year ago रात के बारा बजे फ़ोन की घंटी घनघना रही थी.. विचारों में डूबी कुसुम झट से उठ कर बैठ गई और अपना फ़ोन टटोलने लगी... फ़ोन सामने पड़ा था पर बावरी उसे यहाँ-वहाँ ढूंढ़ रही थी! प्रणव की आवाज़ से उसके ह्रदय को कुछ ठ... Like1pts (6) Comment (5)