संस्मरण मायका द्वारा - चंचल जैन5 days ago वो मायके का सुकूनपीहर की यादें मन को सताती रहती हैं। रोजमर्रा के काम काज से मुक्त हो क्षणात पीहर हो आता है मन। पुनः तरो-ताजगी साथ लेकर ससुराल आ जाता है। माना कि ससुराल भी उतना ही, मानो न मानो उससे भी ... Like1pts (2) Comment (1) शिक्षक दिवस द्वारा - Chanda Dangi10 months ago *संस्मरण* वैसे तो मुझे बचपन से लेकर अबतक सभी गुरुजनों का भरपूर स्नेह और आशीर्वाद मिला कुछ बातें अविस्मरणीय हो जाती है उनमें से एक वाक़या मैं आपके सामने रखना चाहती हूं __ कन्या विद्यालय से आठवीं क... Like1pts (3) Comment (2) शिक्षक! द्वारा - कनक पारख10 months ago शिक्षक दिवस-संस्मरण शिक्षक हमारी गति को गतिमान बनाने के आधार बनते हैं। ऐसा ही हुआ जब मैं छठी कक्षा में पढ़ती थी तो एक बार हिंदी अध्यापिका जी ने हमें "मॉं के साथ रूठने और मनने का आनंद" लेख लिखने ... Like1pts (2) Comment (1) शिक्षक! द्वारा - कनक पारख10 months ago शिक्षक दिवस-संस्मरण शिक्षक हमारी गति को गतिमान बनाने के आधार बनते हैं। ऐसा ही हुआ जब मैं छठी कक्षा में पढ़ती थी तो एक बार हिंदी अध्यापिका जी ने हमें "मॉं के साथ रूठने और मनने का आनंद" लेख लिख... Like1pts Comment (1) शिक्षक दिवस प्रतियोगिता द्वारा - चंचल जैन11 months ago शिक्षक दिवस की अग्रिम शुभकामनाएं। मेरे प्रिय पापा प्रोफेसर जी.एम.मेहता (स्वर्गीय)के श्री चरणों में समर्पित। शिक्षक दिवस की अग्रिम शुभकामनाएं। मेरे प्रोफेसर पापा के श्री चरणों में स... Like1pts (3) Comment (1) बंधन आत्मीयता का.... द्वारा - चंचल जैन11 months ago होली या दिवाली में हम मिले न मिले, राखी पूनम त्यौहार हम भाई-बहन हमेशा साथ मनाते थे। माता-पिता के प्यार-दुलार की छत्रछाया, भाई-बहन के स्नेह की रिमझिम, भाभी जी का अपनापन, चिल्लर पार्टी या... Like1pts (3) Comment (2) क्या सब ठीक है -आत्मा संस्मरण! द्वारा - Monica Sharma12 months ago "क्या सब ठीक है?" – एक स्त्री का आत्मस्वरमोनिका शर्मा आज जब एक महफ़िल में शिरकत की,तो वही पुराने प्रश्नों की बौछार हुई—"क्या सब ठीक है?""पहले से भी कमजोर लग रही हो।"मैं बस मुस्कुरा दी।क्योंकि अंत... Like1pts (3) Comment (5) मेरे पापा द्वारा - चंचल जैन1 year ago नमन माँ शारदेफादर्स डे की आप सबको हार्दिक शुभकामनाएं। मेरे पापा, हमारे बाप्पा ' पापा इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रोफेसर थे। उस जमाने में विद्यार्थी शिक्षकों का पूरा आदर सम्मान करते थे। गर्व था, ... Like1pts (2) Comment (3) मेरी नानी द्वारा - चंचल जैन1 year ago मेरे नानीसा"नानीसा, गरम-गरम चूरमा लड्डू दो। बहुत भूख लगी है।"" नानीसा, आपका गुलकंद कहां है?"" मीठी सुपारी दो।"" जाओ, पहले नाश्ता करो। मंदिर जाना है।" नानीसा के पास माता जी से ज्यादा लाड लगाते हम।... Like1pts (4) Comment (4) रक्षाबंधन! द्वारा - कुसुम सुराणा2 year ago श्मशान की नीरवता को भंग करती आग की लपटें धूं धूं करती आसमान की ओर बढ़ रही थी! मन उद्विग्न था! सब से कम उम्र की बहन कैंसर से जंग हार कर समाधि मरण का वरण कर चूकी थी और हम सब जीवन की नश्वरता को महसूस कर ... Like1pts (4) Comment (2) ईश्वरीय शक्ति.. द्वारा - कुसुम सुराणा2 year ago अस्ताचल का सूरज दूर सफ़र पर निकल चूका था! आसमान में फैली लालिमा आँखों से हौले-हौले ओझल हो रही थी और रात श्यामल चंद्रकला ओढ़ दबे पाँव आ रही थी! कॉलेज का वार्षिक उत्सव ख़त्म हो चूका था और सभी साथी घर... Like1pts (4) Comment दो हंसों का जोड़ा.... द्वारा - कुसुम सुराणा2 year ago "दो हंसों का जोड़ा, बिछड़ गयो रे, गज़ब भयो रामा... गज़ब भयो रे!" गाने के बोल सुन माँ को सांत्वना देने की बजाय मेरी आंखों से भी गंगा-जमुना बहने लगी। आधी सदी से ज्यादा का सफ़र साथ तय करने के बाद हमसफ़... Like1pts (2) Comment (3)