छोटी कहानियाँ

One-Sided
द्वारा - Vishal Chauhan
21 days ago
लबों पर नाम है, पर कह नहीं पाता,दिल के इस शोर को, किसी से नहीं जता पाता।वो साथ चलती है तो, दुनिया ठहर सी जाती है,उसकी हर मुस्कुराहट, मुझे ताउम्र का साथी बनाती है।मैं ख्वाबों मे...
सूझ बूझ!
द्वारा - अशोक दोषी
5 months ago
विषय - सूझबूझविधा - लघुकथा बात बहुत पुरानी है,शादी के तीन महीने बाद मंगला मायके आती है, जो शरीर -सौंदर्य मंगला का पहले था, वो अपेक्षाकृत आधा हो गया था, गुमसुम सी रहती थी मंगला।मायके वाले को...
संघर्ष!
द्वारा - अशोक दोषी
6 months ago
बुधवार 28 जनवरीविषय-संघर्ष कहानी अभी तक उर्मिला की शादी को पच्चीस साल हो चुके थे,बहुत ही कुलीन खाता पीता सुखी परिवार था ,अपने पति कामेश‌‌ का हीरे का अच्छा खासा कारोबार था, जीवन में पहले संघर्ष कर...
लघुकथा उद्योगपति पिता का इकलौता पुत्र, नाम उसका कौशल, कौशल अपने नाम अनुरूप शालीन व होनहार तो था, पर वो इतना सतर्क सजग व चालाक नहीं था, कौशल को माल सामग्री का ज्ञान व अन्य व्यापारिक गुर तो ब...
मोल!
द्वारा - कुसुम सुराणा
7 months ago
शीर्षक : मोल!पिंजरे में कैद 'मुषक' को देख मैंने राहत की साँस ली। कई दिनों से इस मुषक परिवार ने मेरे घर की चुलें हिला दी थी और घर की शान्ति की ऐसी-तैसी कर दी थी।। मुषक बच्चों के माता-पिता बेफिक्र हो वि...
आया हैं जो जीव जगत में, जाएगा।सत्यार्थी जीने वाला सुख, चाहेगा।शूलों से चुग लेगा कलियाँ, संज्ञानी ---जीवन नैया श्रम खेवैया, जीतेगा।।चंचल जैन
दिनांक:१६-१०-२०२५विषय: चित्रा भिव्यक्ति विधा :लघुकथा जतिन क़रीब कोई होगा दस बारह साल का, और बहन सुरेखा पन्द्रह सोलह साल की, हुआ यह कि अचानक दोनों भाई बहनों पर दुःख का पहाड़ टूट प...
रघु!
द्वारा - कुसुम सुराणा
10 months ago
शीर्षक : आशियाना!रघु का घर! घर कहाँ बचा था? सिर्फ मलबा ही तो था! घर तो कब के दफ़न हो चूके थे भूख्खलन की विभिषिका में!राणे परिवार का सिर्फ एक सदस्य बचा था! दस साल का बच्चा, रघु जो अपनी नानी के...
गुरुदेव का प्रवचन धाराप्रवाह चल रहा था।एक-एक शब्द मानों ओस के बूंदों की शीतल बौछार! मधुर, मीठी आमिरस वाणी! सारा वातावरण मानों इत्र की सुगंध से सुरभित था! तपस्वीयों की शारदीय नवरात्रि की ओली की तपस्या ...
नमन मंचशब्द कुसुम विषय- उल्लास /आस्था दिनांक- 24/9/25यह कथा बिल्कुल काल्पनिक है यह मेरा स्वयं का व मौलिक चिंतन है ।शेरमल जैन का बेटा कामेश‌ में आस्था तो न के बराबर थी, पर गणेश हो या नवरात्रि...
एक वही चीज तो है, जो मेरे दिल के बहुत करीब है। आज तक बहुत से किस्से सुनें वरन महसूस करे। इस एक बात से हमें एक बात जरूर समझ आती है कि कुर्सी की अहमियत और ताकत हमारे लिए क्या मायने रखती है। राजेश ज...
श्रीराम
द्वारा - Pankaj Bindas
11 months ago
बालकाल में एक बार भरत जी दौड़े-दौड़े माता कौशल्या की गोदी में जा बैठे, महल में तीनों रानियों संग महाराज दशरथ भी विराजमान थे, वात्सल्य प्रेम से ओतप्रोत माता कौशल्या ने भरत को चूमा और लाड कि...
दिपांशी की नजर बार- बार दरवाजे और घड़ी की आवाज पर बारी बारी उठ रही थी। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ जो उसने आने में इतनी देर लगा दी हो। फोन करके पूछूँ यह ख्याल भी आया लेकिन दूसरे ही क्षण वह गाड़ी चला र...
नायाब रिश्ते....बम्बई निवासी,मध्यम वर्गीय,ईमानदार, कह दो कि बड़ा नेक,मेहनतकश ,ऐसा कहो कि सर्व गुण सम्पन्न ,रमेश हर कारोबार कर चूका था,पर एक भी कारोबार में भी उसे बरकत नहीं मिली,योग ऐसा कि कभी भागीदार ...
शीर्षक : आओगे न भैया....आओगे न भैया....हाथों में हाथ लिए चुने थे जहाँ परिजात, उसी आँगन में फले-फूले हमारे सपने, जज़्बात! माँ-बाबूजी के आशीर्वाद की फुहारों से भीगा था जो आँगन, उसी की मिट्टी की खुशबु में...
"दादी! बहुत बिजी हो गया हूं मैं! फाइनल एग्जाम चालू हो गए हैं मेरे! यश भईया कब आ रहा है 'नानी हाऊस'? "मैं जवाब देती तब तक धैर्य लिफ्ट से नीचे उतर चुका था! गर्मियों की छुट्टियां और 'नानी हाउस' की स...
#विषय जीवन में संघर्षं का महत्व #विधा लघुकथाबम्बई निवासी,मध्यम वर्गीय,ईमानदार, कह दो कि बड़ा नेक,मेहनतकश ,ऐसा कहो कि सर्व गुण सम्पन्न ,रमेश हर कारोबार कर चूका था,पर एक भी कारोबार में उसे बर...
रिश्ते
द्वारा - चंचल जैन
1 year ago
नवांकुर पोषण करे प्रेम नमीं,संयम, समर्पण, विश्वास जमीं।।चंचल जैन