नवीनतम पोस्ट << 181 182 183 184 185 186 187 188 189 190 191 192 193 194 195 196 197 198 199 200 >> Nov 4 कब तक.... कब तक.... शीर्षक: कब तक..... कब तक मन का दर्द मन में छुपाते? पलकों की देहरी पर आँसू रोक पाते? छलकता जाम पराई नज़रों से बचाते? सुलगता ज्वालामुखी थपकियाँ दे सुलाते? भीगे नयनों की भीगी कोरों को सुखाते... द्वारा कुसुम सुराणा ऑथरपॉड 2 year ago कृपया पंजीकरण करे और आपका योगदान दे| Like (1) कृपया पंजीकरण करे और आपका योगदान दे| Comment (1) पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करें पढ़े Nov 4 दो हंसों का जोड़ा.... दो हंसों का जोड़ा.... "दो हंसों का जोड़ा, बिछड़ गयो रे, गज़ब भयो रामा... गज़ब भयो रे!" गाने के बोल सुन माँ को सांत्वना देने की बजाय मेरी आंखों से भी गंगा-जमुना बहने लगी। आधी सदी से ज्यादा का सफ़र साथ तय करने के बाद हमसफ़... द्वारा कुसुम सुराणा ऑथरपॉड 2 year ago कृपया पंजीकरण करे और आपका योगदान दे| Like (2) कृपया पंजीकरण करे और आपका योगदान दे| Comment (3) पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करें पढ़े Nov 4 शीर्षक देश... शीर्षक देश... शीर्षक : देश... देश के नीति-निर्धारक ले, समय-समय पर निर्णय महान! राष्ट्र-अभ्युदय अहम् लक्ष्य ले, बढ़ायें आन-बान-शान! 'मूरत छोटी, किरत बड़ी', लाल बहादूर शास्त्री पंतप्रधान! सप्ताह में एक उ... द्वारा कुसुम सुराणा ऑथरपॉड 2 year ago कृपया पंजीकरण करे और आपका योगदान दे| Like (1) कृपया पंजीकरण करे और आपका योगदान दे| Comment पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करें पढ़े Nov 4 नारी.... नारी.... शीर्षक: नारी! सृष्टि की तू अनुपम रचना, सुन्दर मन की तू अर्चना, जीवनदायिनी तू गंगा-जमुना , पूनम की तू उजली रैना ||१|| धरती सी क्षमाशील तू, अम्बर सी विशाल- ह्रदय तू ... द्वारा कुसुम सुराणा ऑथरपॉड 2 year ago कृपया पंजीकरण करे और आपका योगदान दे| Like (1) कृपया पंजीकरण करे और आपका योगदान दे| Comment (5) पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करें पढ़े Nov 4 विवाह का घर! विवाह का घर! विवाह का घर... माँ-बाबूजी नाराज थे मुझ से... दिल जो तोड़ा था मैंने उनका शीशे के फूलदान सा! आँगन के जामुन के पेड़ से टूट कर धरा पर अस्तव्यस्त बिखरे जामुन से बिखरे थे उनके अरमान! एकलौती बेटी थी न मैं... द्वारा कुसुम सुराणा ऑथरपॉड 2 year ago कृपया पंजीकरण करे और आपका योगदान दे| Like (1) कृपया पंजीकरण करे और आपका योगदान दे| Comment (4) पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करें पढ़े << 181 182 183 184 185 186 187 188 189 190 191 192 193 194 195 196 197 198 199 200 >>