GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyमाँ!माँ के लिए क्या लिखूं मैं,माँ की ही लिखावट हूँ मैं।माँ के गुणगान क्या करूँ मैं,माँ की ही खिलखिलाहट हूँ मैं।।सपनों का नीरव नभ है माँ।भंवरों का मधु गुंजारव है माँ।ममता का शामियाना हैं माँ।दुआओं सुधारस घ...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा कुसुम सुराणाThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें