माँ!
माँ के लिए क्या लिखूं मैं,माँ की ही लिखावट हूँ मैं।माँ के गुणगान क्या करूँ मैं,माँ की ही खिलखिलाहट हूँ मैं।।सपनों का नीरव नभ है माँ।भंवरों का मधु गुंजारव है माँ।ममता का शामियाना हैं माँ।दुआओं सुधारस घ...
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