प्रेम!
उलझा मधु आसक्त, प्रेम अमिरस प्राशन में| जीवन लीला ध्वस्त, मोह-मद-माया-स्थल में ||1|| गिरधर है मम प्राण, सहूँ क्यों विछोह प्रियतम| मीरा के प्रभु जाण, करूँ क्यों विरोध...
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