GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodify प्रेम!उलझा मधु आसक्त, प्रेम अमिरस प्राशन में| जीवन लीला ध्वस्त, मोह-मद-माया-स्थल में ||1|| गिरधर है मम प्राण, सहूँ क्यों विछोह प्रियतम| मीरा के प्रभु जाण, करूँ क्यों विरोध...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा कुसुम सुराणाThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें