GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyजीर्ण-शीर्ण पात शीर्षक : जीर्ण-शीर्ण पात!जीर्ण-शीर्ण पात नहीं, टूट कर बिखर जाऊ।पवन के एक झोंके से, तितर-बितर हो जाऊ।भले खूंट सा खड़ा हूँ, सृजन का समाधान हूँ।धैर्य से भाग्य में लिखा, विधाता का विधान हूँ।।फैली जड़ें गहरी...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा कुसुम सुराणाThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें