जीर्ण-शीर्ण पात
शीर्षक : जीर्ण-शीर्ण पात!जीर्ण-शीर्ण पात नहीं, टूट कर बिखर जाऊ।पवन के एक झोंके से, तितर-बितर हो जाऊ।भले खूंट सा खड़ा हूँ, सृजन का समाधान हूँ।धैर्य से भाग्य में लिखा, विधाता का विधान हूँ।।फैली जड़ें गहरी...
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