सावन की रिमझिम बौछारें...
शीर्षक : पराया धन!पहले सावन की पहली बारीश!प्रकृति ने रची ये कैसी साजिश?यौवन-ज्वार में दहका तन-मन।रिमझिम बौछारों से भीगा मधुवन।प्रियतम मोह में उलझा आँचल,बाबुल द्वार की खनके साँकल।परिणीता-पीहर प्रथम पदा...
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