GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyनादान परिंदा!नादान परिंदा कहे सहचरी से ......जीवनसाथी! कितनी करीब हो दिल के ?क्या आओगी मेरे साथ आसमान छूने?नील गगन में दीवानों सी उड़ान भरने?काला तिल लगे बादलों की ठूठी छूने?कज़रारे घनों संग लुका-छुपी खेलने?पवन संग ...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा कुसुम सुराणाThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें