रासावलय छंद!
"बिखरते रिश्ते, सिमटते लोग"बिखर रहे रिश्ते, सिमट रहे घर-द्वार।मानवीय गुण का, बचा नहीं आधार।मनुज मनुज का है, दुश्मन अति खूंखार।विश्व पटल पर है, प्रिय झंडा बरदार।।राम नाम मुँह में, अमन-शान्ति का गान।हिं...
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