GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyरासावलय छंद! "बिखरते रिश्ते, सिमटते लोग"बिखर रहे रिश्ते, सिमट रहे घर-द्वार।मानवीय गुण का, बचा नहीं आधार।मनुज मनुज का है, दुश्मन अति खूंखार।विश्व पटल पर है, प्रिय झंडा बरदार।।राम नाम मुँह में, अमन-शान्ति का गान।हिं...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा कुसुम सुराणाThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें