निश्चल छन्द!
सादर समीक्षार्थ निश्चल छंद: सच अडा-खड़ा है कोने में, डर कर आज।झूठा बड़ा-चढ़ा कर बोले, बिगाड़ काज।।सब गुलाम, कर सलाम खोले, कभी न राज।बाहुबली पर गिरती कब है, न्यायिक गाज।स्वरचित मौलिक रचना कु...
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