GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyनिश्चल छन्द!सादर समीक्षार्थ निश्चल छंद: सच अडा-खड़ा है कोने में, डर कर आज।झूठा बड़ा-चढ़ा कर बोले, बिगाड़ काज।।सब गुलाम, कर सलाम खोले, कभी न राज।बाहुबली पर गिरती कब है, न्यायिक गाज।स्वरचित मौलिक रचना कु...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा कुसुम सुराणाThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें