GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyरफ़्तार!रफ़्तार पकड़, दौड़ती-भागती रेलगाड़ी!फटी थी चोली, चिथड़े-चिथड़े साड़ी,बिखरे बाल, अधरो पर थी खड़ी बोली!छाती से बंधा शिशु, लटक रही झोली!कानों में गूंजती थी कर्कश, तेज आवाज!दौड़ते-भागते, पेड-पौधों का आगाज...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा कुसुम सुराणाThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें