प्रपोज...
क्यों वक़्त-बेवक़्त चले आते हो?दिल के द्वार पर देते हो दस्तक?चुरा लेते हो नींदे अक्सर,पीछे छोड़ते हो यादों का बवंडर!क्या बनोगे मेरे दिल की धड़कन? सजाओंगे मेरे ख़्वाबों का उपवन?क्या आँखों में होगी तेरी...
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