हम हैं कौन?
गुरुदेव का प्रवचन धाराप्रवाह चल रहा था।एक-एक शब्द मानों ओस के बूंदों की शीतल बौछार! मधुर, मीठी आमिरस वाणी! सारा वातावरण मानों इत्र की सुगंध से सुरभित था! तपस्वीयों की शारदीय नवरात्रि की ओली की तपस्या ...
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