ऋतु सावज़न की....चौपाई छन्द
ऋतु सावन की सुन्दर आई।केसर क्यारी जग महकाई।।घिर-घिर आई कारी बदरी।खग-गण गाएं मीठी कजरी।।अमृत कलश से मात नहाई,कजरी गाएं लोग-लुगाई,बूंद-बूंद भर गगरी लाई,खेत-खलिहान रंगत छाई।सूरजमुखी लड़ाएं नैना,तारों से स...
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