GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyहिचकियाँ!हिचकियां याद दिलाती रही,यादों के झरोखों से मैं झांकती रही!पत्तों की सरसराहट में छुपी तेरी आहट!बादलों की गड़गड़ाहट सी डांट-डपट!परिंदे की फड़फड़ाहट में छुपी चाहत!फूलों की खिलखिलाहट में घुली राहत!हिचकिया...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा कुसुम सुराणाThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें