कल के साये में आज
कल और कल में ही उलझे रहे हम,जो कल आया ही नहीं…और जो कल बीत गया,उसे हम भूल गए कहीं।डर है बस इतना —कि इन कल की उलझनों में,कहीं ये आज…हमें ही ना भुला दे।कल के इंतज़ार में,और बीते कल के भा...
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