GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyमानवता!मानवता मन में खिले, महके चहके बाग।प्रेम गंग बहती रहे, मधु हो सुर लय राग।।मधु हो सुर लय राग, सुरमई जीवन सारा।रवि किरणों का ओज, दया करुणा उजियारा।।आह्लादित हो भोर, नेह सेवा आकुलता।शुभ मंगल हो भाव, फले फ...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा चंचल जैनThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें