मानवता!
मानवता मन में खिले, महके चहके बाग।प्रेम गंग बहती रहे, मधु हो सुर लय राग।।मधु हो सुर लय राग, सुरमई जीवन सारा।रवि किरणों का ओज, दया करुणा उजियारा।।आह्लादित हो भोर, नेह सेवा आकुलता।शुभ मंगल हो भाव, फले फ...
पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े