GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyअभिलाषा!कुंज-कुंज खिलने दो कलियाँ, सूरज से हो आँखें चार!स्तनधारी के शिशु का हो, माँ के दूध पे पहला अधिकार!धरती का सीना चीर, निहारता अंकूर सृष्टि-प्रवेशद्वार!सांसों पे हो अपना राज, हो शुद्ध पवन, पानी, पौष्टिक...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा कुसुम सुराणाThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें