अभिलाषा!
कुंज-कुंज खिलने दो कलियाँ, सूरज से हो आँखें चार!स्तनधारी के शिशु का हो, माँ के दूध पे पहला अधिकार!धरती का सीना चीर, निहारता अंकूर सृष्टि-प्रवेशद्वार!सांसों पे हो अपना राज, हो शुद्ध पवन, पानी, पौष्टिक...
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