GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyबारिश की बूंदेंरुमझुम बूंदें झर रही, गाती मीठा गीत।मन धरती का मचलता, पाकर प्रभु की प्रीत।।पाकर प्रभु की प्रीत, सजायी पुष्पित क्यारी।गगरी में भर प्यार, रंग भर ली पिचकारी।।सुंदर मनहर धूप, मोहिनी बांधे फूंदें।बादल, बिज...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा चंचल जैनThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें