GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyये प्यार ही तो ज़िन्दगी... भाग 5 भाग ५सूरज की सुनहरी किरणों ने वैदेही के गालों को थपथपाया तब कहीं वैदेही आँखें मलते-मलते उठ कर बैठ गई! माँ! कहा हो तुम माँ..वह बोल पड़ी... रसोई घर से आती माँ को देख वैदेही बहुत खुश हुई..कितने दिनों...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा कुसुम सुराणाThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें