दोहे!
. दोहा:  मुक्तकडोर किसी के हाथ में, नाचे कोई और।जीवन का सच जान ले, कर ले उस पर गौर।।मेहनती जो मानवी, निश दिन करता काम~ वर माला गल जीत की, बनता वह सिरमौर।।2. ताटंक छन्द! मुक्तकराजनी...
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