GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyदोहे!. दोहा: मुक्तकडोर किसी के हाथ में, नाचे कोई और।जीवन का सच जान ले, कर ले उस पर गौर।।मेहनती जो मानवी, निश दिन करता काम~ वर माला गल जीत की, बनता वह सिरमौर।।2. ताटंक छन्द! मुक्तकराजनी...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा कुसुम सुराणाThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें