पीहर का आँगन..
पीहर का आँगन खींचे मोहे अपनी ऒर,केसरिया चुनर ओढ़ आई मतवाली भोर!सूरज के रथ के घोड़े दौड़े बादलों के बिच,आँगन में खिली कलियां करें मिचमिच!आँगन की मिट्टी में घुला माँ-बापू का प्यार,दुआओं की नींव पर खड़ा है न...
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