माँ!
माँ!कहां छुपी हो तुम?क्षीरसागर की असीम गहराइयों में?हिमशिखरों की उतुंग चोटियों में?वसुंधरा के विशाल आँचल तले?ब्रह्मांड की अनबुझी पहेलियों में?प्यार के बेहद पवित्र एहसास में?माँ!क्यों आशिषों की ठंडी छा...
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