GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyआओ गणपति देवा आओ गणपति देव, विघ्नहर्ता सुखदाता।भावे पुजते भक्त, सौख्य, विद्या, बल दाता।। हरने पीडा, शोक, पधारो तारणहारा।पूजा, स्तुति, गुण गान, भाव भक्ति नेह धारा।। स्वरचित मौलिक रचनाचंचल जैनमुंबई, महाराष्ट्रLabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा चंचल जैनThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें