सूर घनाक्षरी छंद
सूर घनाक्षरी छंदशीत ऋतु चली आई,कलियाँ ले अंगडाई,मनहर मनोरम,सृष्टि हरषाई।।बलखाती मनचली,ओढ चली अलबेली,चुनरिया सतरंगी,धरा इतराई।।थर थर कांपे गात,धुप लगती सौगात,शाॅल, स्वेटर, रजाई, ठंडी गरमाई।।मूली प...
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